Sunday, January 22, 2017

चुनौती


गलतियों से सीख कर जीवन को मैं पहचान गया 
 विफलता के अज्ञान को समय अनुरूप जान गया
नही डर मुझ को जीवन की आगामी चुनौती से
अनुभव के क्षणों से जीवन पथ का हो भान गया
सफलता के कार्य से मिले वो अपना अधिकार है
कठिनाई के क्षणों में देखो जीवन की ये हुंकार है
 बीत गया वो गत, भविष्य को तुम्हे है निखारना
छोड दो अपना झूठा अहंकार जीवन की ये हार है
अभिषेक शर्मा

पिरामिड

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1
है 
मन 
चंचल 
भटकता 
न ठहरता 
ओझल है लक्ष्य
जीवन की समाप्ति 
2
है 
जन 
विचार
दिशा ज्ञान
भाग्य की रेखा 
निरंतर लुप्त 
व्यर्थ मानव धर्म
3
है 
सेवा 
दायित्व
मानवता 
चरित्रावान 
करूणा हदय
सार्थक हो जीवन
....अभिषेक शर्मा
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Thursday, January 19, 2017

पद
















सपने देखे जाने के संसद में 
फस से गये हम अपने पद मे 
नादान जिन्हें समझ रहे थे हम
लगता बड़े हो गये है वो कद मे
__________ अभिषेक शर्मा

Sunday, January 8, 2017

"सवेरा"
























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नये वर्ष का एक नया सफर है
बीते गम अब खुशियों की लहर है
अपनो के दिलों मे प्यार का पहरा
जीवन के रंगों का हर रंग सुनहरा
चमक रोशनी की जैसे हो दीवाली 
हर पल जीवन मे छाये हरियाली
सारी उलझनों के हुऐ समझौते
प्यार के आँसू पलकों को भिगोते 
 प्रेम के दीपक से मिटा अन्धेररा 
प्रभात की किरण से हुआ सवेरा 
"सवेरा"
____ _______अभिषेक शर्मा

साइकिल की सवारी

















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देखो कैसी ये साइकिल की सवारी है
दो पहियों मे अब न वो साझेदारी है
सीट नयी पर गति वही है पुरानी
जैसे मांगती कोई अपनी उधारी है
_____________अभिषेक शर्मा

सुखद पल "हाइकु"





















सुखद पल "हाइकु"
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नीला अमर
महकती बगिया

सुखद पल


बहता पानी
नदिया के किनारे
सुखद पल

चाँद सूरज
धरती के पहरे
सुखद पल

ईश्वर भक्ति
मन है आनंदित
सुखद पल
 अभिषेक शर्मा
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गुल्लक

























" गुल्लक "

बन्द देह की गुल्लक में अपनी काया है 
छोडो दौलत का मोह झूठी यह माया है 
हसरतों से उपर के सपने होते है झूठे
लालच से उत्पन्न हुई ये कैसी छाया है 
निर्धन को न मिलती दो वक्त की रोटी 
खेल दौलत का यह किसने सिखाया है 
आसमां की चादर में लिपटी ये गरीबी 
घर धनवालों का आज किसने सजाया है 
मासूमियत भी करती हुई बाल मजदुरी 
घूट जहर का मासूमों को किसने पिलाया है 
__________________अभिषेक शर्मा